बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ पर हुई फायरिंग के मामले में नया दावा सामने आया है। रिपोर्ट के मुताबिक, हमलावरों का शुरुआती निशाना टाइगर श्रॉफ नहीं, बल्कि बॉलीवुड का कोई दूसरा बड़ा सेलिब्रिटी था। कथित तौर पर उस सेलिब्रिटी तक पहुंचने में नाकाम रहने के बाद हमलावरों ने अपनी योजना बदल दी और टाइगर को निशाना बनाया।
सोशल मीडिया से जुटाई गई टाइगर की जानकारी
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि हमलावरों को फैन पोस्ट और इंस्टाग्राम पेजों के जरिए टाइगर श्रॉफ की दिनचर्या के बारे में जानकारी मिली थी। उन्हें पता चला कि अभिनेता हर रविवार जुहू के एक फुटबॉल ग्राउंड में जाते हैं और वहां उनकी सुरक्षा अपेक्षाकृत कम रहती है। इसके बाद कथित तौर पर उन्हें निशाना बनाने की योजना बनाई गई।
गाड़ी पर पांच राउंड फायरिंग
18 अक्टूबर को टाइगर श्रॉफ की गाड़ी पर पांच राउंड फायरिंग किए जाने की जानकारी सामने आई। बताया गया कि अभिनेता फुटबॉल ग्राउंड से बाहर निकल रहे थे, तभी हमलावरों ने गोलीबारी की। घटना में टाइगर को मामूली चोट लगने की बात कही गई, जबकि उनके ड्राइवर और एक अन्य व्यक्ति के गंभीर रूप से घायल होने की जानकारी दी गई।
रिपोर्ट के अनुसार, ड्राइवर को गोली लगने के बाद टाइगर खुद ड्राइविंग सीट पर आए और उसे अस्पताल लेकर गए।
कोटा से गिरफ्तार हुए तीन आरोपी
मामले में पुलिस ने तीन आरोपियों को कोटा से गिरफ्तार किया। बताया गया कि तीनों नेपाल भागने की फिराक में थे। गिरफ्तारी के बाद उन्हें पूछताछ के लिए मुंबई लाए जाने की जानकारी सामने आई।
इस बीच, लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े होने का दावा करने वाले लोगों की ओर से भी हमले की जिम्मेदारी लेने की बात सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों में शामिल रिहान का संपर्क अनिल पंडित से था। टाइगर पर हमले को लेकर दोनों के बीच बातचीत होने का भी दावा किया गया है।
सलमान खान के साथ काम करने पर धमकी देने का दावा
हमले के बाद सोशल मीडिया पर अनिल पंडित के नाम से एक पोस्ट सामने आई। इसमें दावा किया गया कि टाइगर श्रॉफ को पहले फोन करके चेतावनी दी गई थी। पोस्ट में सलमान खान के साथ काम करने वाले लोगों को भी धमकी दी गई और कहा गया कि उनकी बात नहीं मानने वालों को आगे निशाना बनाया जा सकता है।
फिलहाल, दूसरे सेलिब्रिटी को पहले निशाना बनाने और हमले के पीछे की वजह से जुड़े दावों की पुष्टि पुलिस जांच के निष्कर्षों से ही हो सकेगी। सोशल मीडिया पोस्ट में किए गए दावों को जांच से पुष्टि होने तक आरोप के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
