PM मोदी ने बताए देश के 3 दुश्मन, रावण दहन के मंच से कही ये बात

 

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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विजयादशमी के अवसर पर दिल्ली के आईपी एक्सटेंशन में आयोजित रावण दहन कार्यक्रम में राष्ट्रहित, सामाजिक एकता और सुशासन पर जोर दिया। उन्होंने बिना किसी का नाम लिए कहा कि देश के मान-सम्मान को चोट पहुंचाने वाली ताकतों, समाज को बांटने वाले लोगों और भारतीय संस्कृति से नफरत करने वाली मानसिकता को पहचानना जरूरी है।

प्रधानमंत्री ने लोगों से अपील की कि वे राष्ट्र को सर्वोपरि रखते हुए एकजुट होकर आगे बढ़ें। उन्होंने कहा, “हमें मां भारती के शत्रुओं को पहचानना होगा, उन्हें परास्त करना होगा और राष्ट्र प्रथम का संकल्प लेते हुए सबको एकसाथ आना होगा।”

रामराज्य को बताया सुशासन का आदर्श

अपने संबोधन में पीएम मोदी ने रामराज्य की अवधारणा का उल्लेख करते हुए इसे सुशासन का मानदंड बताया। उन्होंने कहा कि भगवान राम के आदर्शों पर आधारित शासन में किसी के साथ भेदभाव नहीं होता, सभी को न्याय मिलता है और हर व्यक्ति को समान अवसर प्राप्त होते हैं। सत्ता का उद्देश्य केवल शासन करना नहीं, बल्कि जनता का कल्याण होना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने गोस्वामी तुलसीदास की चौपाई ‘दैहिक, दैविक, भौतिक तापा, रामराज नहीं काहुहि व्यापा’ का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जनता को सर्वोपरि मानते हुए काम करना चाहिए और गरीबों तथा वंचितों की सेवा को प्राथमिकता देनी चाहिए।

भगवान राम के जीवन से सीख लेने का संदेश

पीएम मोदी ने कहा कि भगवान राम का जीवन कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य बनाए रखने और अपने सामर्थ्य पर विश्वास करने की प्रेरणा देता है। चुनौतियां कितनी भी बड़ी क्यों न हों, उनसे निपटने के लिए अपने संसाधनों का सही इस्तेमाल करना और संकल्प के साथ प्रयास करना जरूरी है।

उन्होंने समुद्र पार कर लंका पहुंचने के प्रसंग का उदाहरण देते हुए कहा कि भगवान राम ने सामूहिक शक्ति और जनभागीदारी के माध्यम से कठिन लक्ष्य को संभव बनाया। प्रधानमंत्री ने इसे सफलता का महत्वपूर्ण मंत्र बताते हुए कहा कि देश को भी इसी भावना के साथ आगे बढ़ना चाहिए।

विकसित और आत्मनिर्भर भारत का लक्ष्य

प्रधानमंत्री ने विकसित भारत और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य का जिक्र करते हुए कहा कि जनशक्ति के माध्यम से जनकल्याण करना और जनता की आकांक्षाओं को पूरा करना जरूरी है। उन्होंने राष्ट्रहित के मुद्दों पर सभी राजनीतिक दलों से एकजुट होकर खड़े होने की अपील की।

अपने संबोधन के समापन पर पीएम मोदी ने राष्ट्र प्रथम के संकल्प को दोहराया। उन्होंने कहा कि देश के सम्मान को नुकसान पहुंचाने वाली ताकतों और समाज को बांटने वाली मानसिकता को पहचानकर उनका मुकाबला करना होगा। साथ ही उन्होंने अयोध्या में राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह के दौरान व्यक्त किए गए ‘राम से राष्ट्र और देव से देश’ के संकल्प को पूरा करने का विश्वास जताया।

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