केंद्र की मोदी सरकार में मंत्री एल. मुरुगन ने ऐसा कदम उठाने की इच्छा जताई है, जिसने उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर चर्चा बढ़ा दी है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर मंत्री पद से मुक्त करने और राज्यसभा की सदस्यता छोड़ने की अनुमति मांगी है। लेकिन इसके पीछे वजह क्या है?
दरअसल, मुरुगन अब दिल्ली की राजनीति से हटकर तमिलनाडु में पार्टी को मजबूत करने पर ध्यान देना चाहते हैं। उनका कहना है कि वह जमीनी स्तर पर लौटकर पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ काम करना चाहते हैं।
2029 के चुनाव से पहले बड़ा लक्ष्य
एल. मुरुगन ने स्पष्ट किया कि उनका मकसद 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले तमिलनाडु में भाजपा को मजबूत करना है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश और राज्य की सेवा करने को अपने जीवन का बड़ा सम्मान बताया।
दिहाड़ी मजदूर के बेटे से केंद्रीय मंत्री तक का सफर
मुरुगन 12 मार्च 2020 को भाजपा की तमिलनाडु इकाई के अध्यक्ष बने थे। इससे पहले वह राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के उपाध्यक्ष भी रह चुके हैं। साल 2021 में उन्होंने धारापुरम विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा था, लेकिन DMK की एन. कयालविझी से 1,393 वोटों से हार गए थे।
अब उनका फोकस तमिलनाडु में पार्टी का आधार मजबूत करने पर है। हालांकि, मंत्री पद छोड़ने और राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफे की अनुमति मिलने की स्थिति अलग से स्पष्ट होना बाकी है।