सूरजपुर। छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले के कुबेरपुर गांव में सड़क हादसे के बाद शुरू हुआ विवाद अब पुलिस की कार्रवाई तक पहुंच गया है। हादसे में एक महिला की जान चली गई थी, जिसके बाद ग्रामीणों ने सड़क पर प्रदर्शन किया और आगजनी की। इस मामले में छह ग्रामीणों को जेल भेजे जाने पर मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने पुलिस से पूछा कि हादसे के लिए जिम्मेदार ट्रैक्टर चालक पर कार्रवाई कहां तक पहुंची और क्रशर की वैधता की जांच क्यों नहीं हुई।
मृतका के परिवार से मिलने पहुंचीं मंत्री
मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने चंद्रावती जायसवाल के परिजनों से मुलाकात की। इसके बाद उन्होंने ग्रामीणों के खिलाफ हुई कार्रवाई पर पुलिस अधिकारियों से जवाब मांगा। मंत्री का कहना था कि हादसा दोपहर में हुआ था, जबकि आगजनी शाम को हुई। ऐसे में पुलिस और प्रशासन के पास हालात संभालने के लिए पर्याप्त समय था।
उन्होंने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि तीन दिनों में छह ग्रामीणों को जेल भेज दिया गया, लेकिन क्रशर वैध है या नहीं, यह स्पष्ट नहीं हुआ। मंत्री ने ट्रैक्टर चालक के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने को लेकर भी सवाल उठाए।
कार्रवाई को बताया एकतरफा
मंत्री ने आरोप लगाया कि ग्रामीणों को झूठे मामलों में फंसाया जा रहा है। उन्होंने भाजपा कार्यकर्ताओं को निशाना बनाए जाने पर आपत्ति जताई और घटना के दौरान लाठी लेकर ग्रामीणों को दौड़ाने के आरोपों का जिक्र करते हुए कांग्रेस के एक नेता पर कार्रवाई नहीं होने का सवाल उठाया।
पुलिसकर्मी ने जब बताया कि आरोपियों को जेल भेजने के बाद स्थिति शांत हुई, तो मंत्री ने इस तर्क पर नाराजगी जताई। उन्होंने पुलिस को साफ निर्देश दिया कि ठोस सबूत के बिना किसी ग्रामीण को जेल न भेजा जाए। हिरासत में किसी के साथ मारपीट भी नहीं होनी चाहिए।
कैसे शुरू हुआ था विवाद?
17 अक्टूबर को कुबेरपुर गांव में गिट्टी से लदे ट्रैक्टर की टक्कर से स्कूटी सवार चंद्रावती जायसवाल की मौके पर ही मौत हो गई थी। हादसे के बाद ट्रैक्टर चालक वाहन लेकर फरार हो गया।
महिला की मौत से नाराज ग्रामीणों ने बस्ती के पास स्थित क्रशर हटाने और मृतका के परिवार को मुआवजा देने की मांग की। उन्होंने मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ को जोड़ने वाले मुख्य मार्ग पर चक्काजाम कर दिया। करीब चार घंटे चले प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने ट्रैक्टर और पाठक क्रशर में आग लगा दी।
अधिकारियों को बनाया था बंधक
हंगामे की सूचना पर पुलिस और प्रशासन की टीम गांव पहुंची, लेकिन नाराज ग्रामीणों ने बिहारपुर के तहसीलदार करमचंद जाटवर, एसडीओपी और थाना प्रभारी लक्ष्मी प्रसाद गुप्ता को बंधक बना लिया। अधिकारियों की समझाइश के बाद स्थिति सामान्य हुई और प्रदर्शन समाप्त कराया गया।
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