मांगुर मछली और बकरे की बलि! बस्तर दशहरा की इस रस्म के पीछे क्या है मान्यता?

 

https://www.news4u36.in/2026/10/bastar-dussehra-magarmuhi-ritual-vijay-rath-construction.html

जगदलपुर। बस्तर दशहरा में सदियों पुरानी परंपराओं का पालन करते हुए मगरमुही रस्म पूरी की गई। इस दौरान खाती पुजारी ने विधि-विधान से पूजा की और परंपरा के अनुसार मांगुर मछली व बकरे की बलि दी गई। मान्यता है कि इस रस्म से विजय रथ के निर्माण में कोई बाधा नहीं आती।

मगरमुही रस्म पूरी होने के साथ ही आठ पहियों वाले विशाल विजय रथ को तैयार करने का काम भी आगे बढ़ गया है। यह रस्म रथ निर्माण के महत्वपूर्ण चरणों में से एक है।

रथ के आठ बड़े लकड़ी के पहियों को आपस में जोड़ने के लिए लकड़ी के मजबूत हिस्सों का इस्तेमाल किया जाता है। ये हिस्से रथ के मुख्य ढांचे को मजबूती देते हैं और आधुनिक भाषा में इन्हें चेचिस की तरह समझा जा सकता है।

बस्तर दशहरा की सबसे खास बात यह है कि इतना विशाल रथ आज भी स्थानीय कारीगर पारंपरिक औजारों और अपने अनुभव से तैयार करते हैं। इसके निर्माण में आधुनिक मशीनों के बजाय पारंपरिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है। यह कारीगरों के हुनर और पीढ़ियों से चली आ रही तकनीकी समझ को दर्शाता है।

आठ पहियों वाले इस विजय रथ का उपयोग बस्तर दशहरा के प्रमुख आयोजनों भीतर रैनी और बाहरा रैनी में किया जाता है। मगरमुही रस्म धार्मिक आस्था के साथ-साथ बस्तर की सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक कारीगरी की पहचान भी है।

और नया पुराने