क्या इजरायल से होने वाली है नेतन्याहू की विदाई? विपक्ष की इस मांग ने बढ़ाई हलचल!

 


इजरायल में चुनाव के बाद भी नई सरकार का गठन नहीं हो पाया है। किसी भी गठबंधन को अपने दम पर बहुमत नहीं मिलने के कारण राजनीतिक स्थिति उलझी हुई है। इस बीच प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के विरोधी दलों के बीच मिलकर सरकार बनाने की बातचीत चल रही है।

गादी आइसेनकोट के नेतृत्व वाला मध्यमार्गी गठबंधन अरब पार्टियों के साथ समझौते की कोशिश कर रहा है। वहीं, विपक्षी दलों ने संसद के स्पीकर आमिर ओहाना को पद से हटाने पर भी सहमति बना ली है। ओहाना को नेतन्याहू का करीबी माना जाता है।

प्रधानमंत्री के सीधे चुनाव का प्रस्ताव भी चर्चा में

इजरायल में सरकार गठन को लेकर बार-बार पैदा हो रहे संकट के बीच अब प्रधानमंत्री का चुनाव सीधे जनता से कराने का सुझाव भी सामने आया है। इस व्यवस्था में मतदाता सीधे प्रधानमंत्री को चुन सकेंगे। इसके बाद चुना गया प्रधानमंत्री अपनी पसंद के मंत्रियों के साथ सरकार चला सकेगा।

इस प्रस्ताव पर विपक्षी खेमे में चर्चा हो रही है। शुक्रवार को नई संसद के पहले सत्र में इसे पेश किए जाने की संभावना जताई गई है। बताया जा रहा है कि सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों तरफ से इसे समर्थन मिल सकता है। हालांकि अरब पार्टियां अभी इस मुद्दे पर असमंजस में हैं।

नेतन्याहू के खिलाफ सड़कों पर उतरे लोग

'टाइम्स ऑफ इजरायल' के मुताबिक, शनिवार शाम तेल अवीव, बीरशेबा, हाइफा और तईबा समेत कई शहरों में लोगों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने मध्यमार्गी गठबंधन और अरब पार्टियों से एक साथ आकर सरकार बनाने की मांग की।

प्रदर्शनकारियों का कहना था कि चुनाव में ज्यादातर मतदाताओं ने नेतन्याहू सरकार के खिलाफ मतदान किया है। ऐसे में विरोधी दलों को आपसी मतभेद भुलाकर नई सरकार बनाने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।

बहुमत के आंकड़े में विपक्ष आगे

इजरायल की संसद नीसेट में कुल 120 सदस्य हैं। सरकार बनाने के लिए कम से कम 61 सांसदों का समर्थन जरूरी है।

  • नेतन्याहू विरोधी मध्यमार्गी गठबंधन और अरब पार्टियों के पास कुल 67 सांसद हैं।

  • नेतन्याहू की लिकुड पार्टी के नेतृत्व वाले गठबंधन के पास 53 सांसद हैं।

इसी बीच विपक्षी दलों ने संसद के स्पीकर आमिर ओहाना को हटाने की तैयारी भी शुरू कर दी है। उनका मानना है कि नई संसद में बहुमत के आधार पर यह फैसला नेतन्याहू के लिए राजनीतिक झटका हो सकता है।

फिलहाल सभी की नजर इस बात पर है कि विपक्षी दलों के बीच चल रही बातचीत क्या नई सरकार बनाने का रास्ता खोल पाएगी।

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