पाकिस्तान के बाद अब बांग्लादेश भी सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की के बीच हुए रक्षा समझौते में शामिल होने की संभावना तलाश रहा है। बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान के विदेश मामलों के सलाहकार हुमायूं कबीर ने कहा है कि बदलते वैश्विक हालात और देश की जरूरतों को देखते हुए ढाका इस गठबंधन में शामिल होने के विकल्प को खुला रख रहा है।
इस बयान के बाद भारत की चिंता बढ़ सकती है, क्योंकि शेख हसीना के भारत में रहने और उनके प्रत्यर्पण की मांग को लेकर दोनों देशों के रिश्तों में पहले से ही तनाव है।
क्या है ‘मक्का पैक्ट’?
पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की ने हाल ही में ‘मक्का जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट’ की नींव रखी है। इसके तहत तीनों देशों में से किसी एक पर हमला होने पर उसे सभी पर हमला माना जाएगा। माना जा रहा है कि आगे दूसरे मुस्लिम देश भी इससे जुड़ सकते हैं।
इसी वजह से इसे कई जगह ‘इस्लामिक नाटो’ कहा जा रहा है। हालांकि विशेषज्ञ इसे नाटो जैसा गठबंधन मानने से बच रहे हैं। इसकी संरचना, साझा रणनीति और उद्देश्य अभी नाटो से काफी अलग हैं।
भारत-बांग्लादेश रिश्तों में पहले से तनाव
2024 में शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद भारत और बांग्लादेश के संबंधों में खटास बढ़ी है। शेख हसीना फिलहाल भारत में हैं और ढाका लगातार उनके प्रत्यर्पण की मांग कर रहा है। भारत ने कहा है कि इस मामले पर कानूनी प्रक्रिया के तहत विचार किया जा रहा है।
इसी बीच बांग्लादेश का चीन और पाकिस्तान के साथ बढ़ता संपर्क भी भारत के लिए रणनीतिक चिंता का विषय बन सकता है।
तारिक रहमान के भारत दौरे पर भी संशय
हुमायूं कबीर ने कहा है कि भारत दौरे को लेकर बांग्लादेश जल्दबाजी नहीं करेगा। उनका कहना है कि जब तक दोनों देशों के बीच उचित माहौल नहीं बनता, तब तक प्रधानमंत्री तारिक रहमान की भारत यात्रा मुश्किल हो सकती है।
ऐसे में एक तरफ भारत के साथ रिश्तों में तनाव और दूसरी तरफ पाकिस्तान, चीन तथा संभावित नए रक्षा गठबंधन की ओर बांग्लादेश का झुकाव क्षेत्रीय समीकरणों को और बदल सकता है।